पालघर में हुए हिंदू संतों के जघन्य हत्याकांड

नई दिल्ली: पालघर में हुए हिंदू संतों के जघन्य हत्याकांड में कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (CPM) का हाथ सामने आया है। मामले के 5 मुख्य आरोपी सीपीएम के कार्यकर्ता बताए जा रहे हैं। Organiser की रिपोर्ट के अनुसार, ये कार्यकर्ता हैं दिवाशी गदगपाड़ा गाँव के जयराम धाकड़ भवन, किन्हावली खोरीपाड़ा के महेश सीताराम रावते, दिवाशी वाकीपाड़ा के गणेश देवजी राव, दिव्या सत्पद से रामदास रूपजी असरे और दिवाशी पाटीलपाड़ा गाँव के सुनील सोमाजी रावते।  बता दें कि गुरुवार की रात हिन्दू संत सुशील गिरी महाराज (35), महाराज कल्पवृक्ष गिरि (70) और ड्राइवर नीलेश तेलगड़े (30) को भीड़ ने मार डाला था, जब वे मुंबई में अपने गुरु महंत राम गिरी महाराज के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए जा रहे थे।

अब यह संदेह है कि भीड़ को CPM नेताओं द्वारा उकसाया गया था और पूरी घटना एक पूर्व नियोजित साजिश थी। जिस क्षेत्र में लिंचिंग हुई, वह ईसाई मिशनरी गतिविधि का केंद्र है, जिन पर अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए आदिवासियों को भड़काने देने का आरोप है। ईसाई मिशनरियों द्वारा प्रभावित इस क्षेत्र में वर्षों से भारी मात्रा में धर्मान्तरण हुए हैं। Organiser की रिपोर्ट के अनुसार, बताया गया है कि घटना वाले दिन पुलिस ने तीन पीड़ितों को एक सुरक्षित वन चौकी में रखा था, तभी अचानक एक भीड़ मौके पर पहुंची, कथित तौर पर सीपीएम के नेताओं के इशारे पर, और तीनों पर लाठियों से हमला किया और पुलिस मूकदर्शक बनी रही। गिरफ्तार किए गए सभी 110 लोग सीपीएम के सभी कार्यकर्ता हैं और जो लोग फरार हैं, वे भी सीपीएम के कार्यकर्ता हैं।

कश्तकारी नाम के एक NGO की प्रमुख शिराज बालसारा, उनके पति Peter D’ Mello जो प्रदीप देशभक्त नाम से प्रचार करते हैं, जिनके ईसाई मिशनरियों के साथ भी संबंध हैं, अब गिरफ्तार लोगों की जमानत कराने के लिए काम कर रहे हैं। अब यह आरोप लगाया जा रहा है कि इस घटना के पीछे स्थानीय सीपीएम MLA कामरेड विनोद निकोले का दिमाग है। वहीं विश्व हिन्दू परिषद् (VHP) ने भी पालघर की भीड़ हिंसा में वामपंथियों की संलिप्तता की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।